विराट पर्व  अध्याय १७

द्रौपद्यु उवाच

उपास्ते स्म सभाय़ां यं कृत्स्ना वीर वसुन्धरा |  २८   क
तमुपासीनमद्यान्यं पश्य भारत भारतम् ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति