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आदि पर्व
अध्याय ३३
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सूत उवाच
ये चान्ये सर्पसत्रज्ञा भविष्यन्त्यस्य ऋत्विजः |  १८   क
तांश्च सर्वान्दशिष्यामः कृतमेवं भविष्यति ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति