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द्रोण पर्व
अध्याय १७
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सञ्जय़ उवाच
शप्त्वा तु शपथान्घोरान्सर्वसैन्यस्य पश्यतः |  २८   क
गत्वा दौर्योधनं सैन्यं किं वै वक्ष्यथ मुख्यगाः ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति