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शान्ति पर्व
अध्याय ६३
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भीष्म उवाच
राजप्रैष्यं कृषिधनं जीवनं च वणिज्यया |  ३   क
कौटिल्यं कौलटेय़ं च कुसीदं च विवर्जय़ेत् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति