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शल्य पर्व
अध्याय १७
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सञ्जय़ उवाच
अथोत्थितानि रुण्डानि समदृश्यन्त सर्वशः |  ३०   क
पपात महती चोल्का मध्येनादित्यमण्डलम् ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति