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शल्य पर्व
अध्याय १७
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सञ्जय़ उवाच
आजगाम ततः पार्थो गाण्डीवं विक्षिपन्धनुः |  ६   क
पूरय़न्रथघोषेण दिशः सर्वा महारथः ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति