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द्रोण पर्व
अध्याय १६७
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अर्जुन उवाच
ततः शस्त्रं समुत्सृज्य निर्ममो गतचेतनः |  ३६   क
आसीत्स विह्वलो राजन्यथा दृष्टस्त्वय़ा विभुः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति