शान्ति पर्व  अध्याय २०३

गुरुरु उवाच

वासुदेवः सर्वमिदं विश्वस्य व्रह्मणो मुखम् |  ८   क
सत्यं दानमथो यज्ञस्तितिक्षा दम आर्जवम् ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति