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वन पर्व
अध्याय १७०
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अर्जुन उवाच
तानहं निशितैर्वाणैर्व्यधमं गार्ध्रवाजितैः |  ३१   क
ते युद्धे संन्यवर्तन्त समुद्रस्य यथोर्मय़ः ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति