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वन पर्व
अध्याय १७०
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अर्जुन उवाच
मां तु संहृष्टमनसं क्षिप्रं मातलिरानय़त् |  ६०   क
देवराजस्य भवनं कृतकर्माणमाहवात् ||  ६०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति