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स्त्री पर्व
अध्याय १५
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्मिन्नपरिहार्येऽर्थे व्यतीते च विशेषतः |  १९   क
मा शुचो न हि शोच्यास्ते सङ्ग्रामे निधनं गताः ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति