आदि पर्व  अध्याय ९७

वैशम्पाय़न उवाच

इमे महिष्यौ भ्रातुस्ते काशिराजसुते शुभे |  ९   क
रूपय़ौवनसम्पन्ने पुत्रकामे च भारत ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति