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द्रोण पर्व
अध्याय १७०
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सञ्जय़ उवाच
येन प्रव्राज्यमानाश्च राज्याद्वय़मधर्मतः |  ३५   क
निवार्यमाणेनास्माभिरनुगन्तुं तदेषिताः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति