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द्रोण पर्व
अध्याय १७०
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सञ्जय़ उवाच
द्विपाश्वस्यन्दनेभ्यश्च क्षितिं सर्वेऽवरोहत |  ३९   क
एवमेतन्न वो हन्यादस्त्रं भूमौ निराय़ुधान् ||  ३९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति