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शान्ति पर्व
अध्याय १७१
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भीष्म उवाच
सञ्चितं सञ्चितं द्रव्यं नष्टं तव पुनः पुनः |  २०   क
कदा विमोक्ष्यसे मूढ धनेहां धनकामुक ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति