शान्ति पर्व  अध्याय १७१

भीष्म उवाच

दम्यनाशकृते मङ्किरमरत्वं किलागमत् |  ५४   क
अच्छिनत्काममूलं स तेन प्राप महत्सुखम् ||  ५४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति