menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
अष्टभिर्निशितैश्चैव सोऽश्वत्थामानमार्दय़त् |  ४६   क
विंशत्या पुनराहत्य नानारूपैरमर्षणम् |  ४६   ख
विव्याध च तथा सूतं चतुर्भिश्चतुरो हय़ान् ||  ४६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति