अनुशासन पर्व  अध्याय १३२

उमो उवाच

दुर्दर्शाः केचिदाभान्ति नराः काष्ठमय़ा इव |  ४४   क
प्रिय़दर्शास्तथा चान्ये दर्शनादेव मानवाः ||  ४४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति