menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
तं मत्तमिव सिंहेन राजन्कुञ्जरमर्दितम् |  ५५   क
जवेनाभ्यद्रवञ्शूराः पञ्च पाण्डवतो रथाः ||  ५५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति