आदि पर्व  अध्याय १७२

गन्धर्व उवाच

ईजे च स महातेजाः सर्ववेदविदां वरः |  २   क
ऋषी राक्षससत्रेण शाक्तेय़ोऽथ पराशरः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति