शान्ति पर्व  अध्याय १७२

भीष्म उवाच

वहुविधमनुदृश्य चार्थहेतोः; कृपणमिहार्यमनार्यमाश्रय़न्तम् |  २९   क
उपशमरुचिरात्मवान्प्रशान्तो; व्रतमिदमाजगरं शुचिश्चरामि ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति