menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २१५
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
तमप्रतिवलं दृष्ट्वा विषण्णवदनास्तु ताः |  १७   क
अशक्योऽय़ं विचिन्त्यैवं तमेव शरणं यय़ुः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति