menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १७२
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
निवार्याथ ततः पार्थं सर्वे देवा यथागतम् |  २३   क
जग्मुरन्ये च ये तत्र समाजग्मुर्नरर्षभ ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति