अनुशासन पर्व  अध्याय ३४

वासुदेव उवाच

मातरं सर्वभूतानां पृच्छे त्वा संशय़ं शुभे |  २०   क
केन स्वित्कर्मणा पापं व्यपोहति नरो गृही ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति