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द्रोण पर्व
अध्याय १७२
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सञ्जय़ उवाच
अपरे प्रद्रुतास्तत्र दह्यमाना महागजाः |  २५   क
त्रेसुस्तथापरे घोरे वने दावाग्निसंवृताः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति