menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
chevron_left
chevron_right
व्यास उवाच
रूपं ज्योतिः शव्द आकाशवाय़ुः; स्पर्शः स्वाद्यं सलिलं गन्ध उर्वी |  ६८   क
कामो व्रह्मा व्रह्म च व्राह्मणाश्च; त्वत्सम्भूतं स्थास्नु चरिष्णु चेदम् ||  ६८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति