आदि पर्व  अध्याय १७३

गन्धर्व उवाच

अकृतार्था ह्यहं भर्त्रा प्रसवार्थश्च मे महान् |  १३   क
प्रसीद नृपतिश्रेष्ठ भर्ता मेऽय़ं विसृज्यताम् ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति