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शान्ति पर्व
अध्याय १७३
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भीष्म उवाच
न खल्वप्यरसज्ञस्य कामः क्वचन जाय़ते |  २८   क
संस्पर्शाद्दर्शनाद्वापि श्रवणाद्वापि जाय़ते ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति