शान्ति पर्व  अध्याय ३०७

भीष्म उवाच

केन वृत्तेन भगवन्नतिक्रामेज्जरान्तकौ |  ५   क
तपसा वाथ वुद्ध्या वा कर्मणा वा श्रुतेन वा ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति