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द्रोण पर्व
अध्याय १७३
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व्यास उवाच
ये भक्ता वरदं देवं शिवं रुद्रमुमापतिम् |  १९   क
इह लोके सुखं प्राप्य ते यान्ति परमां गतिम् ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति