द्रोण पर्व  अध्याय १७३

व्यास उवाच

नमस्कुरुष्व कौन्तेय़ तस्मै शान्ताय़ वै सदा |  २०   क
रुद्राय़ शितिकण्ठाय़ कनिष्ठाय़ सुवर्चसे ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति