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द्रोण पर्व
अध्याय १७३
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व्यास उवाच
वाहुं सवज्रं शक्रस्य क्रुद्धस्यास्तम्भय़त्प्रभुः |  ६०   क
स एष भगवान्देवः सर्वलोकेश्वरः प्रभुः ||  ६०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति