भीष्म पर्व  अध्याय ३१

श्रीभगवानु उवाच

मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतसः |  १२   क
राक्षसीमासुरीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति