menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १७४
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
तस्मिन्गिरौ प्रस्रवणोपपन्ने; हिमोत्तरीय़ारुणपाण्डुसानौ |  १६   क
विशाखय़ूपं समुपेत्य चक्रु; स्तदा निवासं पुरुषप्रवीराः ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति