menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १७४
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
ततश्च यात्वा मरुधन्वपार्श्वं; सदा धनुर्वेदरतिप्रधानाः |  २१   क
सरस्वतीमेत्य निवासकामाः; सरस्ततो द्वैतवनं प्रतीय़ुः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति