उद्योग पर्व  अध्याय १७४

भीष्म उवाच

पतिर्वापि गतिर्नार्याः पिता वा वरवर्णिनि |  ७   क
गतिः पतिः समस्थाय़ा विषमे तु पिता गतिः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति