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आदि पर्व
अध्याय १८४
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वैशम्पाय़न उवाच
अर्धं च भीमाय़ ददाहि भद्रे; य एष मत्तर्षभतुल्यरूपः |  ६   क
श्यामो युवा संहननोपपन्न; एषो हि वीरो वहुभुक्सदैव ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति