शान्ति पर्व  अध्याय १७५

भीष्म उवाच

स एव भगवान्विष्णुरनन्त इति विश्रुतः |  २०   क
सर्वभूतात्मभूतस्थो दुर्विज्ञेय़ोऽकृतात्मभिः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति