वन पर्व  अध्याय १७५

वैशम्पाय़न उवाच

स तेजस्वी तथा तेन भुजगेन वशीकृतः |  १९   क
विस्फुरञ्शनकैर्भीमो न शशाक विचेष्टितुम् ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति