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उद्योग पर्व
अध्याय १७५
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अकृतव्रण उवाच
इह रामः प्रभाते श्वो भवितेति मतिर्मम |  १३   क
द्रष्टास्येनमिहाय़ान्तं तव दर्शनकाङ्क्षय़ा ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति