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शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
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श्रीभगवानु उवाच
एकशृङ्गः पुरा भूत्वा वराहो दिव्यदर्शनः |  २७   क
इमामुद्धृतवान्भूमिमेकशृङ्गस्ततो ह्यहम् ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति