वन पर्व  अध्याय १७६

वैशम्पाय़न उवाच

सोऽहं परमदुष्कर्मा वसामि निरय़ेऽशुचौ |  २४   क
सर्पय़ोनिमिमां प्राप्य कालाकाङ्क्षी महाद्युते ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति