वन पर्व  अध्याय १७६

वैशम्पाय़न उवाच

पश्य दैवोपघाताद्धि भुजवीर्यव्यपाश्रय़म् |  २८   क
इमामवस्थां सम्प्राप्तमनिमित्तमिहाद्य माम् ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति