आदि पर्व  अध्याय ३

सूत उवाच

मुखेन गर्भं लभतां युवानौ; गतासुरेतत्प्रपदेन सूते |  ७०   क
सद्यो जातो मातरमत्ति गर्भ; स्तावश्विनौ मुञ्चथो जीवसे गाः ||  ७०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति