वन पर्व  अध्याय १७६

वैशम्पाय़न उवाच

स धर्मराजो मेधावी शङ्कमानो महद्भय़म् |  ४६   क
द्रौपदीं परिपप्रच्छ क्व भीम इति भारत ||  ४६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति