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शान्ति पर्व
अध्याय १७७
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भृगुरु उवाच
वल्ली वेष्टय़ते वृक्षं सर्वतश्चैव गच्छति |  १३   क
न ह्यदृष्टेश्च मार्गोऽस्ति तस्मात्पश्यन्ति पादपाः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति