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शान्ति पर्व
अध्याय १७७
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भृगुरु उवाच
श्लेष्मा पित्तमथ स्वेदो वसा शोणितमेव च |  २३   क
इत्यापः पञ्चधा देहे भवन्ति प्राणिनां सदा ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति