शान्ति पर्व  अध्याय २०६

गुरुरु उवाच

तस्य माय़ाविदग्धाङ्गा ज्ञानभ्रष्टा निराशिषः |  ३   क
मानवा ज्ञानसंमोहात्ततः कामं प्रय़ान्ति वै ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति