menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १७८
chevron_left
chevron_right
सर्प उवाच
सोऽय़मेता गतीः सर्वा जन्तुश्चरति कार्यवान् |  १४   क
नित्ये महति चात्मानमवस्थापय़ते नृप ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति