उद्योग पर्व  अध्याय १७८

भीष्म उवाच

विभ्रंशिता त्वय़ा हीय़ं धर्मावाप्तेः परावरात् |  ६   क
परामृष्टां त्वय़ा हीमां को हि गन्तुमिहार्हति ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति